तीरंदाजी की महारथी Deepika Kumari का संघर्ष भरा सफर

Deepika Kumari

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कौन है Deepika Kumari

Deepika Kumari एक ऐसा नाम जो अभी Social Media से लेकर Media तक हर जगह छाया हुआ है। दरअसल, भारत की स्टार महिला Archer Deepika Kumari ने पेरिस में चल रहे तीरंदाजी विश्व कप में इतिहास रच दिया। विश्व कप स्टेज 3 में रिकर्व व्यक्तिगत स्पर्धा को 6-0 से जीतकर Gold Medal की अपनी हैट्रिक पूरी की। आपको बता दें कि, इस जीत के साथ Deepika दुनिया की नंबर 1 महिला तीरंदाज बन गई हैं। विश्व तीरंदाजी ने हालही में अपनी ताजा रैंकिंग जारी की जिसमें Deepika को पहला स्थान मिला। Deepika Kumari ने दूसरी बार तीरंदाजी में यह उपलब्धि हासिल की है।

वहीं आज Deepika को हर कोई जानने लगा है लोग उनकी Success को बहुत प्रोत्साहित कर रहे है। जिसके चलते आज हम आपको Deepika के बारे में वो तमाम बाते बताएंगे जो आज ज्यादातर लोग नहीं जानते है। आज हम बात करेंगे Deepika Kumari के बारे में, उनके करियर के बारे में और उनके निजी जीवन के बारे में। इसके साथ ही आज हम आपको Deepika Kumari के इस gold achivment के पीछे की संघर्ष भरी कहानी भी बताएंगे। तो चलिए जानते है Deepika Kumari के बारे में तमाम बातें:

परिचय

Deepika Kumari का जन्म 13 जून 1994 को झारखंड की राजधानी रांची में हुआ था। Deepika एक middle class family से है उनके पिता का नाम शिव नारायण महतो है जोकि पेशे से एक ऑटो चालक हैं। वहीं Deepika की मां का नाम गीता महतो है जो मेडिकल कॉलेज में एक नर्स रह चुकी है। कहते हैं ना कि ‘पूत के पाँव पालने में दिख जाते हैं।’ Deepika भी कुछ ऐसी ही थी। आपको बता दें कि, उनका निशाना बचपन से तेज था।

Deepika Kumari Family
Deepika Kumari Family

वहीं एक बार की बात है Deepika एक दिन अपनी मां के साथ कहीं जा रही थी। रास्ते में Deepika को एक आम का पेड़ दिखा और उन्होंने अपनी मां से आम तोड़ने की इजाजत मांगी, लेकिन उनकी मां ने यह कहते हुए मना कर दिया कि पेड़ बहुत ऊँचा हैं तुम नहीं तोड़ पाओगी। लेकिन Deepika भी कहाँ हार मानने वाली लड़कियों में से नहीं थी। उन्होंने एक पत्थर मारा और आम जमीन पर आ गिरा। आपको बता दें कि, Deepika Kumari ने आम के पेड़ पर निशाना लगा कर ही अपनी प्रैक्टिस शुरू की थी।

असफलता लगी हाथ

जैसा की हमने बताया कि, Deepika Kumari को बचपन से ही तीरंदाजी करना अच्छा लगता था। जिसके चलते एक दिन Deepika को किसी ने बताया कि झारखण्ड के सरायकेला में तीरंदाजी प्रतियोगिता चल रही है। इसके बाद उन्होंने अपने पिता से वहां ले चलने के लिए कहा। फिर दोनों वहां गए लेकिन इस दौरान इस प्रतियोगिता में Deepika Kumari को असफलता हाथ लगी। उनका मनोबल थोड़ा डगमगाया लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने गोल में फोकस किया।

खुद को बनाया काबिल

Deepika Kumari का बचपन से ही एक ही सपना था और एक ही फोकस था कि वो एक तीरंदाज बने। लेकिन पहली बार हाथ लगी असफलता से वह निराश हो गई। अपनी बेटी को निराश देख उनके पिता ने Deepika को कोचिंग करवाने का निर्णय लिया। लेकिन जब उनके पिता उन्हें एक कोच के पास लेकर पहुंचे तो कोच ने यह कहकर मना कर दिया कि तुम्हारा वजन बहुत कम है, तुम तीरंदाजी नहीं कर सकती।

Deepika Kumari
Deepika Kumari

इसके बाद Deepika ने अपने आप को साबित करने के लिए कोच से 6 महीने का समय माँगा। इसके बाद Deepika ने उन 6 महीने में जी-तोड़ मेहनत की और आख़िरकार उनका सिलेक्शन हो गया। इसीलिए कहते है कभी हिम्मत नहीं हारना चाहिए। और यहीं से हुई Deepika के करियर की शुरुआत।

Gold Medal किया अपने नाम

आपको बता दें कि, साल 2005 में Deepika Kumari ने।अर्जुन आर्चरी अकादमी ज्वाइन की। इस अकादमी की ख़ास बात यह है कि, इसे झारखंड के मुख्यमंत्री रहे अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा ने शुरू किया था। अकादमी ज्वाइन करने के एक साल बाद साल यानी 2006 में उन्होंने टाटा तीरंदाजी अकादमी ज्वाइन की। इस acadamy से Deepika ने तीरंदाजी के दांव-पेच सीखे। इसके बाद साल 2006 में ही Deepika ने मैरीदा मेक्सिको में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में कम्पाउंट एकल प्रतियोगिता में Gold Medal जीतकर अपना परचम लहरा दिया।

कॉमनवेल्थ में की जीत हासिल

एक असफलता के बाद Deepika Kumari ने कई सफलताएं हासिल की। वहीं साल 2009 के बाद साल 2010 में हुए एशियन गेम्स में Deepika Kumari ने Bronze Medal जीता। इसके बाद साल 2010 में ही हुए कॉमनवेल्थ खेलों में Deepika Kumari ने व्यक्तिगत स्पर्धा में तो Gold Medal हासिल किया। साथ ही महिला रिकर्व टीम को भी स्वर्ण दिलाया। इसके बाद Deepika Kumari ने साल 2011 में इस्तांबुल में और साल 2012 में टोक्यो में हुए खेलों रजत पदक जीता। आपको बता दें कि, Deepika ने पहली बार लंदन 2012 के ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया, लेकिन उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली। लेकिन उन्होंने कभी अपने मनोबल को निचे नहीं गिरने दिया।

ऐसे बनी दुनियां की no.1 खिलाडी

कई जगह अपना और अपने देश का नाम रौशन करने के बाद Deepika ने साल 2013 में हुए अंताल्या विश्व कप में Gold, 2013 शंघाई विश्व कप में रजत, 2015 कोपेनहेगन विश्व चैंपियनशिप में रजत (महिला टीम), 2018 साल्ट लेक सिटी विश्व कप में स्वर्ण, 2018 तुर्की विश्व कप में कांस्य (महिला रिकर्व) पदक भी अपने नाम किया। एक भारतीय के लिए इतने सारे अचीवमेंट्स प्राप्त करने एक बहुत बड़ी सफलता है। वहीं Deepika आज अपने शानदार खेल की बदौलत विश्व तीरंदाजी में दुनिया की नंबर 1 खिलाड़ी भी बन चुकी है।

आर्चरी वर्ल्ड कप

Deepika की सफलता बस यही तक सीमित नहीं है उन्हें अभी अपने जीवन काल में कई बड़े Achivments और हासिल करने है। वहीं Deepika ने हालही में पेरिस में चल रहे आर्चरी के वर्ल्ड कप स्टेज 3 टूर्नामेंट में एक दिन में देश को 3 गोल्ड दिलाए। देश को Deepika पर गर्व है। उन्होंने पहले अपने पति के साथ मिलकर मिक्स्ड इवेंट में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद दीपिका के नेतृत्व में ही भारतीय महिला रिकर्व टीम ने स्वर्ण पदक जीता, और फिर उन्होंने व्यक्तिगत इवेंट में भी देश को स्वर्ण पदक दिलाया।

विशेष तथ्य

आशा करती हु कि, आप सभी अपने घरों में Safe होंगे और आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई होगी। Deepika Kumari के बारे में तमाम जानकारी आपको मिल गई होगी अगर आप हमसे कुछ भी पूछना चाहते है तो आप Comment के जरिए पूछ सकते है। आपको जल्द ही उसका Reply मिलेगा। ऐसी ही पोस्ट के लिए help2hindi के और पोस्ट पढ़े।

About Akanksha Jain

नमस्कार दोस्तों, मैं Akanksha Jain Help2Help की Biography Author हूँ. Education की बात करूँ तो मैं Mass Communication से Graduate हूँ. मुझे Biography पढ़ना और दूसरों को पढ़ाना में बड़ा मज़ा आता है.

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