स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत MANGAL PANDEY की जीवनी

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कौन थे MANGAL

MANGAL PANDEY का नाम हर एक इंसान से सुना है। मंगलपांडे BHARAT के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत थे। आप ऐसा कह सकते है कि, स्वतंत्रता के पीछे मंगल पांडे का बहुत बड़ा हाथ था। इन्होने अंग्रेजों का खून इस कदर जलाया है कि अंग्रेज 100 सालों के अंदर ही अपनी हुकूमत छोड़ कर चले गए। दरअसल, मंगल पांडे BRITISH EAST INDIA COMPANY के अंतर्गत 34वीं बंगाल नेटिव इन्फेंट्री में एक सिपाही थे। अंग्रेजी हुकुमत ने उन्हें गद्दार और विद्रोही की संज्ञा दी पर मंगल पांडे प्रत्येक भारतीय के लिए एक महानायक हैं।

परिचय

स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत MANGAL PANDEY का जन्म 30 जनवरी 1831 को संयुक प्रांत के बलिया जिले के नगवा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम दिवाकर पांडे और माता का नाम श्रीमती अभय रानी था। मंगल पांडे का जन्म एक सामान्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था। लेकिन रोजी-रोटी की मजबूरी ने उन्हें अंग्रेजों की फौज में नौकरी करने पर मजबूर कर दिया।

BRITISH EAST INDIA COMPANY में हुए शामिल

जिसके बाद जब पांडे 22 साल के हुए तब वे BRITISH EAST INDIA COMPANY की सेना में शामिल हुए। मंगल बैरकपुर की सैनिक छावनी में “34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री” की पैदल सेना में एक सिपाही थे। EAST INDIA COMPANY की रियासत और इशाई मिस्नरियों के धर्मान्तर आदि की नीति ने लोगों के मन में अंग्रेजी हुकुमत के प्रति नफरत पैदा कर दी थी। वहीं जब कंपनी की बंगाल इकाई में ‘एनफील्ड पी.53’ राइफल में नई कारतूसों का इस्तेमाल शुरू हुआ तो मामला और बिगड़ गया।

इन कारतूसों को बंदूक में डालने से पहले मुंह से खोलना पड़ता था। वहीं इसको लेकर भारतीय सैनिकों के बीच खबर फैल कि इन कारतूसों को बनाने में गाय तथा सूअर की चर्बी का प्रयोग किया जाता है। उनके मन में ये बात घर कर गयी कि अंग्रेज हिन्दुस्तानियों का धर्म भ्रष्ट करने पर अमादा हैं क्योंकि ये हिन्दू और मुसलमानों दोनों के लिए नापाक था।

भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम

MANGAL PANDEY द्वारा शुरू किया गया यह विद्रोह 10 मई 1857 को शुरू हुआ था। जिसके चलते UTTARPRADESH के मेरठ की सैनिक छावनी में भी बगावत हो गयी और यह विद्रोह देखते-देखते पूरे उत्तरी भारत में फैल गया। इस बगावत और मंगल पांडे की शहादत की खबर फैलते ही अंग्रेजों के खिलाफ जनता भड़क उठी। लेकिन इस विद्रोह में अंग्रेज अपना दबाने में सफल हो गए। इस विद्रोह में सैनिकों समेत अपदस्थ राजा-रजवाड़े, किसान और मजदूर भी शामिल हुए। उन्होंने इस विद्रोह के जरिए अंग्रेजों को संदेश दिया कि अब भारत पर राज्य करना उतना आसान नहीं है जितना वे समझ रहे थे।

अंग्रेजों से हुई लड़ाई

9 फ़रवरी 1857 को रायफल को सेना में बांट दिया गया, इस दौरान सबको इसका उपयोग करना सिखाया जा रहा था। वहीं जब BRITISH OFFICER ने इसे मुंह से लगाकर बताया तो MANGAL PANDEY ने ऐसा करने से मना कर दिया। जिसके बाद OFFICER को गुस्सा आया और सजा के तौर पर मंगल पांडे को सेना से निकाल दिया गया। वहीं जब एक OFFICER उनसे वर्दी व् रायफल वापस लेने के लिए आगे बढ़े तो मंगल पाण्डेय ने उन पर हमला बोल दिया। उन्होंने अपने साथीयों से मदद मांगी, लेकिन अंग्रेजों से डर के मारे कोई भी आगे नहीं आया। जिसके चलते पांडे ने अफसर पर गोली चला दी। जिसके बाद ब्रिटिश अफसरों ने उन्हें पकड़ लिया।

फांसी

इस पूरी घटना की वजह से BRITISH GOVERNMENT हिल गई थी। वहीं इस घटना के बाद PANDEY हिरासत में रहे। वहीं घटना के दौरान मंगल पांडे के पैर पर भी गोली लगी थी जो पूरे एक चलते बाद ठीक हुई। ऐसा माना गया कि उनको कोई दवाई दी गई थी, जिस वजह से उन्होंने ये कारनामा किया। लेकिन पांडे ने हमेशा इस बात को खण्डित करते हुए कहा था कि, किसी ने उन्हें कोई दवाई नहीं दी, न ही किसी के कहने पर या दबाब में आकर उन्होंने ये काम किया।

मंगल पाण्डेय को कोर्ट मार्शल करने का फैसला सुनाया गया। जिसके बाद 6 अप्रैल 1857 को फैसला हुआ कि 18 अप्रैल को उन्हें फांसी दी जाएगी। लेकिन BRITISERS को पांडे का डर बैठ गया था जिसकी वजह से उन्होंने 18 की जगह 10 दिन पहले यानी 8 अप्रैल को ही मंगल पाण्डेय को फांसी पर लटका दिया।

मंगल पांडे पर बनी BIOPIC

आपको बता दें कि, 2005 में मंगल पांडे के ऊपर एक BIOPIC MOVIE बनी। इस फिल्म का नाम था “मंगल पाण्डेय – दी रायसिंग स्टार” इस मूवी में BOLLWOOD ACTOR AMIR KHAN ने MANGAL PANDEY का रोल किया है। आमिर खान के साथ इस मूवी में रानी मुखर्जी, अमीषा पटेल भी थी। फिल्म को केतन मेहता ने डायरेक्ट किया था। इस मूवी को दर्शकों में बहुत प्यार दिया था और सभी किरदारों की भी सराहना की थी। आमिर खान ने हर FILM की तरह इस फिल्म के रोल को बखूबी निभाया है। इतना ही नहीं आमिर की ACTING के साथ-साथ उनके लुक की भी लोगों ने काफी तारीफ की थी।

इस मूवी में बताया गया है कि, अंग्रेज सरकार ने उनकी छवि को ख़राब करने की बहुत कोशिश की 1857 में मंगल पाण्डेय को विद्रोही के रूप में सबके सामने लाया गया। मंगल पांडे ने जिस बात की शुरुआत की थी, उसे अपनी मंजिल में पहुँचने में 90 साल का लम्बा सफर तय करना पड़ा। ऐसे महापुरुष को पूरा देश सलाम करता है।

मेरी बातें

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नमस्कार दोस्तों, मैं Akanksha Jain Help2Help की Biography Author हूँ. Education की बात करूँ तो मैं Mass Communication से Graduate हूँ. मुझे Biography पढ़ना और दूसरों को पढ़ाना में बड़ा मज़ा आता है.

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